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शनिवार, अप्रैल 06, 2013

आइये जाने की क्या करें और क्या नहीं करें..सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दोरान..???


आइये  जाने की क्या करें और क्या नहीं करें..सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दोरान..???

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 अप्रैल से वर्ष का चौथा महीना शुरू हो गया है। लेकिन हिन्दू कैलेंडर यानी पंचांग के अनुसार 11 अप्रैल से नव वर्ष  2013 (गुरुवार) से शुरू होगा। 

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार इस वर्ष  2013-14 में तीन ग्रहण लगने वाले हैं। इनमें दो सूर्य ग्रहण होंगे और एक चन्द्रग्रहण।

पहला सूर्य ग्रहण 9 मई,2013   की रात में लगेगा। इसलिए यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा। दूसरा सूर्यग्रहण 3 नवंबर को लगेगा, यह भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इन दोनों सूर्यग्रहण में सूतक के दान, स्नान का विचार करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इनका असर भारत पर नहीं होगा। 

इस वर्ष का एक मात्र चन्द्रग्रहण 25 अप्रैल की मध्य रात्रि के बाद 1 बजकर 22 मिनट पर लगेगा और 1 बजकर 53 पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा। ग्रहण का सूतक 25 तारीख को भारतीय मानक समय के अनुसार 4 बजकर 22 मिनट से शुरू होगा।

ग्रहण के समय चन्द्रमा तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में होगा। तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र में जिनका जन्म हुआ है उन्हें चन्द्रग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए चन्द्रमा एवं शुक्र के मंत्र का जप करना चाहिए।

ग्रहगोचर के आधार पर -----
पंचाग भवानीशंकर निर्णयसागर चण्डमार्तण्ड पंचाग नीमच के आधार पर इस वर्ष भूमण्डल पर पाॅच ग्रहण पडेगे परन्तु भारत में एक भी ग्रहण मान्य नही होगा । प्रथम ग्रहण पूर्णिमा चैत्र मास शुक्ल पक्ष में दिनांक 25 अप्रैल 2013 को पडने वाला चन्द्रग्रहण अंगुलाल्प ग्रास आदेश्य नही माना जा सकता । क्योकि अंगुलाल्पग्रास ग्रहण को मनुष्य की आखों से नही देखा जा सकता है ।

अतः इस ग्रहण का दोष मान्य नही है । अतः इस ग्रहण को अनादेश्य नही पालने वाला माना गया है । यह ही उपरोक्त पंचाग ने अपना निर्णय दिया है । आचार्य भास्कराचार्य ने भी यहा पुष्टि की है कि अंगुलाल्प ग्रास को नहीप पालने में ही बुद्विमानी है । 

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार कुछ पंचाग ने इस ग्रहण को माना है । परन्तु सेवाक्रम की बात करे तो इस ग्रहण जो मनुष्य की आखो से नही दिखे तो ऐसे ग्रहण को मानने की अनुमति हमारे धर्मसिन्धु निर्णयसिन्धु ग्रन्थ भी नही देते है । शास्त्र में यह भी कहा जाता है कि देखो को ग्रहण और सुने का सूतक मान्य होता है ।

सूर्यग्रहण में सूतक 12 घंटे पहले और चंद्रग्रहण में सूतक 9 घंटे पहले लगता है । सूतक काल में जहाँ देव दर्शन वर्जित माने गये हैं वहीं मन्दिरों के पट भी बन्द कर दिये जाते हैं । इस दिन जलाशयों, नदियों व मन्दिरों में राहू, केतु व सुर्य के मंत्र का जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है और ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म हो जाता है ।

       हमारे ऋषि मुनियों ने सुर्यग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिये मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में किटाणु बहुलता से फैल जाते हैं । खाद्य वस्तु, जल आदि में सुक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं।  

इसलिये ऋषियों ने पात्रों में क़ुश अथवा तुलसी डालने को कहा है, ताकि सब किटाणु कुश में एकत्रित हो जायें और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है, ताकि किटाणु मर जायें। ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिये बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अन्दर ऊष्मा का प्रवाह बढे, भीतर बाहर के किटाणु नष्ट हो जायें, और धूल कर बह जायें।
      पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन न करने के विषय में जीव विज्ञान विषय के प्रोफेसर टारिंस्टन ने पर्याप्त अनुसन्धान करके सिद्ध किया है कि सुर्य चन्द्र ग्रहण के समय मनुष्य के पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके कारण इस समय किया गया भोजन अपच, अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर शारीरिक या मानसिक हानि पहुँचा सकता है ।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार भारतीय धर्म विज्ञान वेत्‍ताओं का कहना है कि सूर्य-चन्‍द्र ग्रहण लगने से 10 घंटे पूर्व से ही इसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है। अंतरिक्ष प्रदुषण के समय को सूतक काल कहा जाता है। इसलिए सूतक काल और ग्रहण काल के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों के सेवन की मनाही की गयी है। चॅंकि ग्रहण से हमारी जीवन शक्ति का ह्रास होता है और तुलसी दल (पत्र) में विद्युत शक्ति व प्राण शक्ति सबसे अधिक होती है, इसलिए सौर मंडलीय ग्रहण काल में ग्रहण प्रदूषण को समाप्‍त करने के लिए भोजन व पेय सामग्री में तुलसी के कुछ पत्‍ते डाल दिए जाते हैं। जिसके प्रभाव से न केवल भोज्‍य पदार्थ बल्कि अन्‍न, आटा आदि भी प्रदूषण से मुक्‍त बने रह सकते हैं।

       पुराणों की मान्‍यता के अनुसार राहू चन्‍द्रमा को तथा केतू सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों छाया की संतान है । चन्‍द्रमा और सूर्य की छाया के साथ साथ चलते हैं । चन्‍द्रग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है, और मन की शक्ति क्षीण होती है । जबकि सूर्य ग्रहण के समय जठराग्नि नेत्र तथा पित्‍त की शक्ति कमजोर पड़ती है ।
      
पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण लगने से पूर्व नदी या घर में उपलब्‍ध जल से स्‍नान करके भगवान का पूजन, यज्ञ, जप करना चाहिए । भजन कीर्तन करके ग्रहण के समय का सदुपयोग करें । ग्रहण के दौरान कोई कार्य न करें । ग्रहण के समय में मंत्रों का जप करने से सिध्‍दि प्राप्‍त होती है ।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण की अवधि में तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल-मूत्र् त्‍याग करना, केश विन्‍यास करना, रति क्रीडा करना, मंजन करना वर्जित किए गये हैं । कुछ लोग ग्रहण के दौरान भी स्‍नान करते हैं । ग्रहण समाप्‍त हो जाने पर स्‍नान करके ब्राम्‍हण को दान करने का विधान है । कहीं कहीं वस्‍त्र् धोने, बर्तन धोने का भी नियम है । पुराना पानी, अन्‍न नष्‍ट कर नया भोजन पकाया जाता है, और ताजा भरकर पीया जाता है, क्‍योंकि डोम को राहू केतु का स्‍वरूप माना गया है ।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्रग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए (1 प्रहर = 3 घंटे) । बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व खा सकते हैं । ग्रहण के दिन पत्‍ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए । बाल और वस्‍त्र् नहीं निचोड़ने चाहिए एवं दंत धावन नहीं करना चाहिए । ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना मल मूत्र् का त्‍याग करना, मैथून करना और भोजन करना ये सब वर्जित कार्य हैं । ग्रहण के समय मन से सत्‍पात्र् को उद्देश्‍य करके जल में जल डाल देना चाहिए ऐसा करने से देने वाले को उसका फल प्राप्‍त होता है और लेने वाले को उसका दोष भी नहीं लगता है । ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्‍न, जरूरत मंदों को वस्‍त्र् दान देने से अनेक गुना पुण्‍य प्राप्‍त होता है।


पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। भगवान वेदव्यास जी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।


देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है। ग्रहण के अवसर पर पृथ्‍वी को नहीं खोदना चाहिए ।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर ( 9 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालकक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।

ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जररूतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।


गर्भवती स्त्रियों के लिये सावधानी------

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार गर्भवती स्त्री को सूर्य – चन्‍द्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्‍योकि उसके दुष्‍प्रभाव से शिशु अंगहीन होकर विकलांग बन जाता है । गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है । इसके लिए गर्भवती के उदर भाग में गोबर और तुलसी का लेप लगा दिया जाता है, जिससे कि राहू केतू उसका स्‍पर्श न करें ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को कुछ भी कैंची, चाकू आदि से काटने को मना किया जाता है , और किसी वस्‍त्र आदि को सिलने से मना किया जाता है । क्‍योंकि ऐसी मान्‍यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंग या तो कट जाते हैं  या फिर सिल (जुड़) जाते हैं ।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार क्या सावधानियां रखे ग्रहण के समय..???

1 ग्रहण के सोने से रोग पकड़ता है किसी कीमत पर नहीं सोना चाहिए।
2 ग्रहण के समय मूत्र् – त्‍यागने से घर में दरिद्रता आती है ।
3 शौच करने से पेट में क्रीमी रोग पकड़ता है । ये शास्‍त्र् की बातें हैं इसमें किसी का लिहाज नहीं होता।
4 ग्रहण के समय संभोग करने से सूअर की योनी मिलती है ।
5 ग्रहण के समय किसी से धोखा या ठगी करने से सर्प की योनि मिलती है ।
6 जीव-जन्‍तु या किसी की हत्‍या करने से नारकीय योनी में भटकना पड़ता है ।
7 ग्रहण के समय भोजन अथवा मालिश किया तो कुष्‍ठ रोगी के शरीर में जाना पड़ेगा।
8 ग्रहण के समय बाथरूम में नहीं जाना पड्रे ऐसा खायें।
9 ग्रहण के दौरान मौन रहोगे, जप और ध्‍यान करोगे तो अनन्‍त गुना फल होगा।

पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार ॥ ग्रहण विधि निषेध ॥

 १. सूर्यग्रहण मे ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चंद्र ग्रहण मे तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये । बूढे बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुध्द बिम्बदेख कर भोजन करना चाहिये । (१ प्रहर = ३ घंटे)
 २.  ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोडना चाहिए । बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहियेव दंत धावन नहीं करना चाहिये ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल मूत्र का त्याग करना, मैथुन करना औरभोजन करना - ये सब कार्य वर्जित  हैं ।
 ३. ग्रहण के समय मन से सत्पात्र को उद्दयेश्य करके जल मे जल डाल देना चाहिए ।  ऐसा करने से देनेवालेको उसका फल प्राप्त होता है और लेनेवाले को उसका दोष भी नहीं लगता।
४. कोइ भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये और नया कार्य शुरु नहीं करना चाहिये ।
 ५. ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थो मे तिल या कुशा डाली होती है, वे पदार्थ दुषित नहीं होते । जबकि पके हुएअन्न का त्याग करके गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिये ।
 ६. ग्रहण वेध के प्रारंभ मे तिल या कुशा मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति  मे ही करना चाहिये और ग्रहण शुरु होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिये ।
 ७. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरुरतमंदों को वस्त्र दान से अनेक गुना  पुण्य प्राप्तहोता है ।
 ८. तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किंतु  संतानयुक्त ग्रहस्थको ग्रहणऔर संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिये।
 ९. 'स्कंद पुराण' के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआसब पुण्यनष्ट हो जाता है ।
 १०. 'देवी भागवत' में आता है कि भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिये ।


पण्डित दयानंद शास्त्री ( mob.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण के समयकेसे करें  मंत्र् सिध्दि ..???

1.   ग्रहण के समय “ ॐ ह्रीं नमः “ मंत्र का 10 माला जप करें इससे ये मंत्र् सिध्‍द हो जाता है । फिर अगर किसी का स्‍वभाव बिगड़ा हुआ है .... बात नहीं मान रहा है .... इत्‍यादि ..... । तो उसके लिए हम संकल्‍प करके इस मंत्र् का उपयोग कर सकते हैं ।
2.  श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्ध होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणाशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाकसिद्धि प्राप्त कर लेता है।

सोमवार, अप्रैल 01, 2013

चंद्रग्रहण ( गुरुवार, दिनांक 25/26 अप्रैल 2013 ) के बारे में जानकारी ---


चंद्रग्रहण ( गुरुवार, दिनांक 25/26 अप्रैल 2013 ) के बारे में जानकारी ---


नव सम्वत्सर विक्रम संवत 2070 आगामी 11 अप्रेल से आरम्भ होने जा रहा हें अगर आपके काम बन रहे हैं, तो अच्‍छी बात है, अगर रुकावटें सामने खड़ी हैं तो घबराइये नहीं। 

सन् 2013 में पांच ग्रहण होंगे किंतु भारत में एक ही ग्रहण खग्रास चंद्रग्रहण होगा। वह भी अंगुल से भी कम होगा। 

पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार इस साल 25 अप्रैल को हनुमान जयंती पर अल्प खंडग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह संयोग 16 साल बाद बना है। इस दिन हनुमत आराधना का विशेष महत्व होगा। इससे पहले 15 अप्रैल, 1995 को ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण और दो अप्रैल 1996 को खंडग्रास चंद्रग्रहण हनुमान जयंती पर आए थे।हनुमान जयंती पर पूर्ण चंद्रग्रहण का संयोग अब चार अप्रैल 2015 को बनेगा। 

खग्रास चंद्रग्रहण- चैत्र शुक्ल पूर्णिमा गुरुवार दिनांक 25/26 अप्रैल 2013 को अर्द्ध रात्रि को होगा।
इस ग्रहण का यम नियम-सूतक 25  अप्रेल,2013 (गुरुवार) को दोपहर में 04  बजकर 21  मिनट से शुरू होगा तथा ग्रहण का प्रारंभ स्पर्श (26  अप्रेल) रात्रि में 01  बजकर 21  मिनिट से होगा तथा मोक्ष शुद्धि रात्रि 01  बजकर 35 मिनिट पर होगी( कुल ग्रहण अवधि  --32  मिनट)

पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार  नववर्ष का यह पहला चंद्रग्रहण भारत में देखा जा सकेगा। आंशिक चंद्रग्रहण तब होता है जब चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में छिपने के कारण कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी से महरूम हो जाता है, हालांकि यह तभी होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सीधी रेखा में हो। 
पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार यह खण्डग्रास चंद्रग्रहण स्वाती नक्षत्र तथा तुला राशि में लगेगा. इसलिए इस राशि और इस नक्षत्र में पैदा हुए जातकों को इस ग्रहण का प्रभाव देखने को मिल सकता है. इस राशि का स्वामी शुक्र है इसलिए शुक्र का जप, दान आदि करना लाभदायक हो सकता है.
पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार इस साल कुछ राशियों में ग्रहों पर सूर्य एवं चंद्र की दृष्टि बदलने वाली है। और तब हो सकता है आपकी किसमत चमक उठे, या फिर अचानक भाग्‍य खुल जाये और तरक्‍की के रास्‍ते पर आप चल पड़ें। ऐसा संभव है साल के पांच दिनों में। ये पांच दिन ग्रहण के हैं। इस साल यानी वर्ष 2013 में 2 सूर्य ग्रहण पड़ेंगे और 3 चंद्र ग्रहण। यदि आप गर्भवती हैं, या आपके घर में कोई महिला गर्भवती है या फिर आप इस साल फेमिली प्‍लानिंग करने जा रहे हैं, तो इन तिथियों को कैलेंडर में नोट कर लें।
वर्ष 2013 में 10 मई को वल्याकार सूर्यग्रहण होगा। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की लुका छिपी का यह रोमांचक नजारा भारत में नही देखा जाएगा, क्योंकि इस खगोलीय घटना के समय में अमावस की काली रात होगी। वल्याकार सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस तरह आ जाता है कि पृथ्वी के निहारने पर सौर मंडल का मुखिया चमकदार कंगन की तरह दिखाई देता है। 
अतः नियम एवं संयम के साथ स्नान जप, तप, और हवन यज्ञ के द्वारा बाधाओं की निवृत्ति एवं सुखों की प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करना चाहिए। 

दिव्य पर्वों में ग्रहण का भी विशेष स्थान है। ग्रहण के समय भोजन आदि करने से अनेक रोग होते हैं। इसीलिए आहार आदि अनेक कार्य वर्जित हैं। उस समय जो घड़े में भरा जल या भोजन रखा हो, वह भी फिर उपयोग करने योग्य नहीं होता। 

पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार मन तथा बुद्धि पर पड़े प्रभाव से लाभ उठाने के लिए जप, ध्यानादि का विधान है। ग्रहण के समय किए गए जप, यज्ञ, दान आदि का सामान्य की अपेक्षा बहुत अधिक महत्व वर्णित है। ग्रहण के समय स्त्री प्रसंग से नर-नारी दोनों की नेत्र ज्योति क्षीण हो जाती है। अनेक बार अंधे होने का भी भय हो जाता है। 
वर्ष 2013 में 25 मई को उपच्छाया चंद्रग्रहण का नजारा दिखाई देगा। इस वक्त पूर्णिमा का चंद्रमा पूरा नजर आएगा, लेकिन उसकी तेज चमक कुछ देर के लिए खो जाएगी और पृथ्वी का उपग्रह धुंधला दिखाई देगा, जो भारत में नहीं निहारा जा सकेगा, क्योंकि उस समय देश में सूरज चमक रहा होगा। उपच्छाया संबंधी जानकारी देते हुए गुप्त ने बताया कि यह चंद्रग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पेनुम्ब्रा (ग्रहण के समय धरती की परछाई का हल्का भाग) से होकर गुजरता है। इस समय चंद्रमा पर पडऩे वाली सूर्य की रोशनी आंशिक रूप से कटी प्रतीत होती है और ग्रहण को चंद्रमा पर पडऩे वाली धुंधली परछाई के रूप में देखा जा सकता है। पूर्ण सूर्यग्रहण के समय विशेष खगोलीय स्थिति के कारण पृथ्वी से देखने पर पूरा सूर्य चंद्रमा की ओट में छिपा प्रतीत होता है। 

पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार इस प्रकार ग्रहण का प्रभाव तर्क एवं परीक्षण से भी सिद्ध है। ग्रहण काल में मन माने आचरण से मानसिक अव्यवस्था और बुद्धि विकार तो होता ही है साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य की भी बड़ी हानि होती है। अतः इस संबंध में सबको सावधान रहना चाहिए साथ ही कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
चंद्रग्रहण के कारण बाजारों में हलचल रहेगी। दालें, बाजरा, तिल, सरसों, अलसी, सोयाबीन के भाव बढ़ेंगे। खाद्यान्न महंगे होंगे। सोने  -चाँदी   की कीमतों में गिरावट आएगी। राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल रहेगी। हालांकि जनता के हित में कोई  कदम उठाया जा सकता है। 

साल के दो सूर्य ग्रहण-
इस साल पड़ने वाले सूर्य ग्रहण की बात करें तो पहला 10 मई और दूसरा 3 नवंबर को पड़ेगा। इन दोनों तिथियों पर आपकी करियर लाइव, निजी जीवन, आय के स्रोत, परिवार, प्रेम-संबंध, आदि में व्‍यापक परिवर्तन हो सकते हैं। खुशियां आ सकती हैं या हो सकता है दु:ख घर कर जाये, लिहाजा आपको इन तिथियों पर विशेष सावधानी बरतनी होगी। बेहतर होगा यदि उन सभी बातों का पालन करें, जो बड़े बुजुर्ग बताते हैं।

साल के तीन चंद्र ग्रहण------

हिंदू धर्म की मान्‍यता के अनुसार चंद्र ग्रहण अच्‍छा नहीं माना जाता है। इस साल पहला चंद्र ग्रहण 25 अप्रैल को पड़ेगा, दूसरा 25 मई को और तीसरा 18 अक्‍तूबर2013 को। इन तिथियों पर आप गरीबों को दान दें। गरीबों को भोजन करायें, मंत्रों का उच्‍चारण करें, जिनमें गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्‍ठ फल देगा। अपने ईष्‍ट देव का ध्‍यान करें। भोजन नहीं करें। ग्रहण के बाद स्‍नान करें और ताज़ा भोजन करें। साथ ही यदि आप गर्भवती हैं तो आपके होने वाले बच्‍चे पर ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिये एकांत स्‍थान पर बैठ जायें और ईश्‍वर का ध्‍यान करें। यह काम आप सूर्य ग्रहण के समय भी करें।
उपछायी चंद्रग्रहण चूंकि ग्रहण की छाया की उप छाया होती है, जो सीधे नजर नहीं आती। इसलिए इसे ग्रहण की श्रेणी में नहीं माना जाता।   
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ग्रहण में दान करें : ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार  ग्रहण मोक्ष के पश्चात गर्म कपड़े, काला कंबल, छाता, उड़द, इमरती, तिल, गुड दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। 
ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण का प्रभाव मनुष्यों पर शुभ-अशुभ दोनों ही तरह से पड़ता है। अशुभ प्रभाव से बचने के लिए और शुभ प्रभाव को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए उक्त उपाय कारगर हो सकते हैं। प्रस्तुत हैं ग्रहण से बचने के कुछ खास उपाय...। 
ग्रहण काल में इन मंत्रों का जाप करें। 
- ॐ सों सोमाय नमः 

- ॐ रां राहवे नमः 

- ॐ नमः शिवाय

------ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार चंद्रमा मूलतः मन का देवता है। राहु-केतु के निकट होने से अंधकार की स्थिति में मानसिक अशांति और तनाव उत्पन्न होता है। इस ग्रहण से बीमार, मानसिक विकृति वाले लोगों को अधिक कष्ट हो सकता है। अत: दुर्घटना, मानसिक रोग और तनाव से बचने के लिए चंद्रग्रहण पर राहु से संबंधित उपाय करने चाहिए।

 ---ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार सबसे पहले घर के प्रमुख द्वार व खिड़कियों पर गेरू से स्वस्तिक या ॐ का चिन्ह अंकित करे, यदि यह संभव न हो तो कम से कम उसके आस-पास गेरू के कुछ टुकड़े अवश्य रखे। यह ग्रहण से उत्पन्न विकिरण को घर में प्रवेश से प्रभावशाली तरीके से रोकता है।
-----रसोई व अन्न भंडार की सुरक्षा-----ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार रसोई के द्वार पर थोड़ा सा गेरू या ज़रा सा गोबर लगा देना बहुत ही प्रभावशाली व शुभ माना जाता है जिससे आपकी रसोई ग्रहण के प्रभाव से बच जाती है और शुद्धता बनी रहती है। जहां कहीं भी आपने रसोई के स्टोर बनाया हो और सभी सूखे सामानों में मुख्यतः राशन में तुलसी के पत्ते व कुछ कुछ घास रखना ग्रहण के प्रभाव से मुक्ति व सुरक्षा देता है।
-----गर्भवती स्त्री की सुरक्षा------किसी भी गर्भवती स्त्री को ग्रहण में बाहर (खुले में) नहीं निकलना चाइये, दहलीज़ नहीं पार करनी चाइये। उसकी सुरुक्षा के लिए परिवार के सदस्यों को चाहिए के उसके कमरे के प्रवेश पर गेरू औऱ गोबर से स्वस्तिक बनाए। स्वस्तिक या ॐ अंकित कर दें।
-------- पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें-----ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार ग्रहण से पूर्व या ग्रहण उपरांत ब्रह्मण को अन्न का दान करना आपके पूरे परिवार को ग्रहण के दोष से मुक्त कर ईश्वर की कृपा दिलाता है।
------ सर्व दोष मुक्त-----किसी भी वास्तु दोष निवारण के लिए ग्रहण के सूतक काल से शुरू कर के 3 बजे से शुरू करके रात्रि 3.30 तक। यदि कोई भी व्यक्ति वास्तु देवता के मंत्र ॐ वास्तु पुरुषाय नम: का यथा सामर्थ जाप करता है तो उसके सभी वास्तु दोषों में तत्काल कमी आती है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री  (मोब.--09024390067 ) के अनुसार इस खण्डग्रास चंद्रग्रहण ( गुरुवार, दिनांक 25/26 अप्रैल 2013 ) का सभी राशियों पर प्रभाव निम्न होगा  -

मेष राशि -----

मेष राशि वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण उनके सप्तम भाव में लगेगा. इसलिए जीवनसाथी से संबंधित परेशानी हो सकती हैं या जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट भी हो सकता है.

वृष राशि -----

वृष राशि वाले व्यक्तियों की कुण्डली में यह ग्रहण छठे भाव में घटित होगा. इसलिए आपको रोग आदि घेरे रह सकते हैं. आपको गुप्त चिन्ताएँ भी सता सकती हैं.

मिथुन राशि -----

आपकी राशि से यह ग्रहण पांचवें भाव में लग रहा है. आपके खर्चे अधिक होगें और आमदनी कम हो सकती है. आपके कार्य विलम्ब से बन सकते हैं. इसलिए मन खिन्न रह सकता है.

कर्क राशि-----

आपकी राशि से यह ग्रहण चतुर्थ भाव में घटित होगा. आपके रुके हुए कार्य बन सकते हैं. कार्य सिद्धि की संभावना बनती है.

सिंह राशि-----

आपकी जन्म राशि सिंह है और सिंह राशि से तीसरे भाव में ग्रहण लग रहा है. इस समय आपके प्रयास दोगुने हो सकते हैं और आपको उनका अनुकूल फल भी मिल सकता है. धन लाभ की भी संभावना बनती है.

कन्या राशि-----

आपकी कन्या राशि से दूसरे भाव में यह ग्रहण लगेगा. इस ग्रहण के प्रभावस्वरुप आपको कुटुम्ब संबंधी परेशानियो का सामना करना पड़ सकता है. आपको धन हानि हो सकती है. आप यात्राओं पर जा सकते हैं.

तुला राशि------

तुला राशि में ही यह ग्रहण घटित हो रहा है. इस ग्रहण के प्रभाव से आपको शारीरिक कष्ट हो सकते हैं. दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है. मानसिक चिन्ताएँ घेर सकती हैं.

वृश्चिक राशि------

इस राशि से बारहवें भाव में ग्रहण लगेगा. इस ग्रहण के प्रभाव से आपके खर्चे बने रह सकते हैं. आपके अपव्यय हो सकते हैं अथवा धन हानि उठानी पड़ सकती है.

धनु राशि -----

आपकी जन्म राशि से एकादश भाव में यह खग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है. आपकी उन्नति के योग बनते हैं और आपको लाभ आदि मिलने की भी संभावना बनती है.

मकर राशि ------

आपकी जन्म राशि मकर से यह ग्रहण दशम भाव में घटित हो रहा है. आपको रोग सता सकते हैं. आपको अकारण कष्ट घेर सकते हैं. आप बिना कारण बहय से ग्रस्त हो सकते हैं. व्यवसायिक क्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है.

कुंभ राशि -----

कुंभ राशि से यह ग्रहण नवम भाव में घटित हो रहा है. आपका भाग्य आपका साथ देने में कंजूसी कर सकता है. आपको चिन्ताएँ बनी रह सकती है. संतान पक्ष की ओर से भी मन असंतुष्ट हो सकता है अथवा संतान को कष्ट हो सकता है.

मीन राशि ------

आपकी मीन राशि से यह ग्रहण अष्टम भाव में लग रहा है. आपको शत्रुभय सता सकता है. आपको लाभ भी प्राप्त होने की संभावना बनती है. आपको यह लाभ उम्मीद से कुछ कम हो सकता है.